Taittiriya Brahmana - Kand

of 27 /27
TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 1- www.sanskritweb.net/yajurveda TaittirÁya-BrÀhmaÉa Book 3, Chapter 12 Edited by Subramania Sarma, Chennai Final proofread version, 1st April 2005 [[3-12-1-1]] ता अिरमा॒ऽयाम काम॑म। आशा॑ना ा॒ िवा॒ आशा ̎। अन॑ नो॒ऽान॑मितरिद॑न मत म। कामो॑ भत कामद ̎जा॒न िपता िवराजा ̎म। यो रा॒यो॑ऽय यः। आपो॑ भा आिद॑यािम। त॑ भरि यो दः। पव॑ दवा॒ अप॑रण ाणापा॒नौ। ह॒वाह ि॑म॥ १॥ दश॑॥ १॥ [[3-12-2-1]] दवो॒ ेे वै लो॒किरो॑ऽभवत। जाप॑ितमवन। े॒ जा॑पत वै नो॑ लो॒किरो॑ऽभत। तमि॒ित॑। य॑तिभरै ̎त। य॑तिभना॑िवत। तिमि॑िभरै ̎त। तिमि॑िभर॑िवत। तिदी॑नािमिम। ए॑यो वै नाम॑। ता इ॑य इाच॑त परो॑ण। परो॑िया इव िदवाः॥ १॥

description

veda

Transcript of Taittiriya Brahmana - Kand

Page 1: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 1- www.sanskritweb.net/yajurveda

TaittirÁya-BrÀhmaÉa

Book 3, Chapter 12 Edited by Subramania Sarma, Chennai

Final proofread version, 1st April 2005

[[3-12-1-1]]

त ता अिरमाऽयाम त कामम। आशाना ा िवा आशा । अन नोऽानमितरिदन मत म। कामो भत कामद । जान िपता िवराजा म। यो रायोऽय यः। आपो भा आिदयािम। त भरि यो दः। पव दवा अपरण ाणापानौ। हवाह िम॥ १॥ त दश॥ १॥ [[3-12-2-1]]

दवो व ग लोकिरोऽभवत। त जापितमवन। जापत ग व नो लोकिरोऽभत। तमिित। त यतिभर त। त यतिभनािवत। तिमििभर त। तिमििभरिवत। तिदीनािमिम। एयो ह व नाम। ता इय इाचत परोण। परोिया इव िह दवाः॥ १॥

Page 2: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 2- www.sanskritweb.net/yajurveda

[[3-12-2-2]]

तमाशाऽवीत। जापत आशया व ा िस। अहम वा आशा ऽि। मा न यज। अथ त साऽऽशा भिवित। अन ग लोक वसीित। स एतमय कामाय परोडाशमाकपाल िनरवपत। आशाय चम। अनम चम। ततो व त साऽऽशाऽभवत। अन ग लोकमिवत। सा ह वा अाशा भवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय कामाय ाहाऽऽशाय ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ २॥ [[3-12-2-3]]

त कामो ऽवीत। जापत कामन व ा िस। अहम व कामो ऽि। मा न यज । अथ त सः कामो भिवित। अन ग लोक वसीित। स एतमय कामाय परोडाशमाकपाल िनरवपत। कामाय चम।

Page 3: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 3- www.sanskritweb.net/yajurveda

अनम चम। ततो व त सः कामोऽभवत। अन ग लोकमिवत। सो ह वा अ कामो भवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय कामाय ाहा कामाय ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ३॥ [[3-12-2-4]]

त ा वीत। जापत णा व ा िस। अहम व ा ि। मा न यज। अथ त वाो भिवित। अन ग लोक वसीित। स एतमय कामाय परोडाशमाकपाल िनरवपत। ण चम। अनम चम। ततो व त वाोऽभवत। अन ग लोकमिवत। वा वा अ यो भवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय कामाय ाहा ण ाहा ।

Page 4: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 4- www.sanskritweb.net/yajurveda

अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ४॥ [[3-12-2-5]]

त यो ऽवीत। जापत यन व ा िस। अहम व यो ऽि। मा न यज। अथ त सो यो भवित। अन ग लोक वसीित। स एतमय कामाय परोडाशमाकपाल िनरवपत। याय चम। अनम चम। ततो व त सो योऽभवत। अन ग लोकमिवत। सो ह वा अ यो भवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद । सोऽ जहोित। अय कामाय ाहा याय ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ५॥ [[3-12-2-6]]

तमापोऽवन। जापतऽ व सव कामा िताः। वयम वा आप ः। अा यज। अथ िय सव कामा िय। अन ग लोक वसीित।

Page 5: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 5- www.sanskritweb.net/yajurveda

स एतमय कामाय परोडाशमाकपाल िनरवपत। अम। अनम चम। ततो व तिव कामा अय। अन ग लोकमिवत। सव ह वा अिामा य। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय कामाय ाहाऽः ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ६॥ [[3-12-2-7]]

तमिबिलमानवीत। जापतऽय व बिलमत सवािण भतािन बिल हरि। अहम वा अिबिलमानि। मा न यज। अथ त सवािण भतािन बिल हिरि। अन ग लोक वसीित। स एतम य कामाय परोडाशमाकपाल िनरवपत। अय बिलमत चम। अनम चम। ततो व त सवािण भतािन बिलमहरन। अन ग लोकमिवत। सवािण ह वा अ भतािन बिल हरि। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद।

Page 6: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 6- www.sanskritweb.net/yajurveda

सोऽ जहोित। अय कामाय ाहाऽय बिलमत ाहा। अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ७॥ [[3-12-2-8]]

तमनिविरवीत। जापत ग व लो कमनिविविस। अहम वा अनिविरि। मा न यज। अथ त साऽनिविभिवित। अन ग लोक वसीित। स एतमय कामाय परोडाशमाकपाल िनरवपत। अनिव चम। अनम चम। ततो व त साऽनिविरभवत । अन ग लोकमिवत। सा ह वा अानिविभवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय कामाय ाहाऽनिव ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ८॥ [[3-12-2-9]]

ता वा एताः स ग लोक ार । िदवःयनयोऽनिवयो नाम। आशा थमा रित। कामो ितीया म।

Page 7: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 7- www.sanskritweb.net/yajurveda

ततीया म। यतथम। आप पमीम। अिबिल माीम। अनिविः समीम। अन ह व ग लोक िवित। कामचारो ऽ ग लोक भवित। य एतािभिरििभयजत। य उ चना एव वद। तािि। पौहीवरा दा स च। िय चाभार सम॥ ९॥॥ २॥ [[3-12-3-1]]

तपसा दवा दवताम आयन। तपसषय रिवन। तपसा सपाणदामारातीः। यनद िव पिरभत यदि। थमज दव हिवषा िवधम। यभ परम तपो यत। स एव पः स िपता स माता। तपो ह य थ म सबभव। या दवो दवमत। ा िता लोक दवी॥ १॥ [[3-12-3-2]]

सा नो जषाणोप यमागा त। कामवाऽमत हाना। ा दवी थमजा ऋत। िव भ जगतः िता। ता ा हिवषा यजामह ।

Page 8: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 8- www.sanskritweb.net/yajurveda

सा नो लोकममत दधात। ईशाना दवी भवनािधपी। आगा हिविरद जषाणम। यावा जिर भवन च िव । त िवधम हिवषा घतन॥ २॥ [[3-12-3-3]]

यथा दवः सधमाद मदम। य ितोविरम। यावा जिर भवन च सव । तमचप य न आगा त। ातीपमोदमानम। मनसो वश सविमद बभव। ना मनो वशमियाय। भीो िह दवः सहस सहीयान। स नो जषाण उप यमागा त। आकतीनामिधपित चतसा च॥ ३॥ [[3-12-3-4]]

सकजित दव िवपिम। मनो राजानिमह वधयः। उपहव ऽ समतौ ाम। चरण पिव िवतत पराणम। यन पतरित तािन। तन पिवण शन पताः। अित पाानमराित तरम। लोक ारमिचमिव म। ोिताजमान महत। अमत धारा बधा दोहमानम। चरण नो लोक सिधता दधात। अिमधा भव ।

Page 9: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 9- www.sanskritweb.net/yajurveda

अन नोऽानमितरिदनमत म। हवाह िम॥ ४॥ दवी घतन चतसा च दोहमान चािर च॥ ३॥ [[3-12-4-1]]

दवो व ग लोकिरोऽभवत। त जापितमवन। जापत ग व नो लोकिरोऽभत। तमिित। त यतिभर त। त यतिभनािवत। तिमििभरत। तिमििभरिवत। तिदीनािमिम। एयो ह व नाम। ता इय इाचत परोण। परोिया इव िह दवाः॥ १॥ [[3-12-4-2]]

त तपो ऽवीत। जापत तपसा व ा िस। अहम व तपो ऽि। मा न यज। अथ त स तपो भिवित। अन ग लोक व सीित। स एतमा यमाकपाल िनरवपत। तपस चम। अनम चम। ततो व त स तपोऽभवत। अन ग लोकमिवत। स ह वा अ तपो भवित।

Page 10: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 10- www.sanskritweb.net/yajurveda

अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय ाहा तपस ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ २॥ [[3-12-4-3]]

त ाऽवीत। जापत या व ा िस। अहम व ाऽि। मा न यज । अथ त सा ा भिवित। अन ग लोक वसीित। स एतमा यमाकपाल िनरवपत। ाय चम। अनम चम। ततो व त सा ाऽभवत। अन ग लोकमिवत। सा ह वा अ ा भवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय ाहा ाय ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ३॥ [[3-12-4-4]]

त समवीत।

Page 11: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 11- www.sanskritweb.net/yajurveda

जापत सन व ा िस। अहम व समि। मा न यज। अथ त स स भिवित। अन ग लोक वसीित। स एतमा यमाकपाल िनरवपत। साय चम। अनम चम। ततो व त स समभवत। अन ग लोकमिवत। स ह वा अ स भवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय ाहा साय ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ४॥ [[3-12-4-5]]

त मनो ऽवीत। जापत मनसा व ा िस। अहम व मनो ऽि। मा न यज। अथ त स मनो भिवित। अन ग लोक वसीित। स एतमा यमाकपाल िनरवपत। मनस चम। अनम चम । ततो व त स मनोऽभवत।

Page 12: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 12- www.sanskritweb.net/yajurveda

अन ग लोकमिवत। स ह वा अ मनो भवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय ाहा मनस ाहा । अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहाित॥ ५॥ [[3-12-4-6]]

त चरणमवीत। जापत चरणन व ा िस। अहम व चरणमि। मा न यज। अथ त स चरण भिवित। अन ग लोक वसीित। स एतमा यमाकपाल िनरवपत। चरणाय चम। अनम चम। ततो व त स चरणमभवत। अन ग लोकमिवत। स ह वा अ चरण भवित। अन ग लोक िवित। य एतन हिवषा यजत। य उ चनदव वद। सोऽ जहोित। अय ाहा चरणाय ा हा। अनम ाहा जापतय ाहा । गाय लोकाय ाहाऽय िकत ाहित॥ ६॥

Page 13: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 13- www.sanskritweb.net/yajurveda

[[3-12-4-7]]

ता वा एताः प ग लोक ार । अपाघा अनिवयो नाम। तप थमा रित। ा ितीया म। स तती याम। मनतथम। चरण पमीम। अन ह व ग लोक िवित। कामचारो ऽ ग लोक भवित। य एतािभिरििभयजत। य उ चना एव वद। तािि। पौहीवरा दा स च। िय चाभार सम॥ ७॥॥ ४॥ [[3-12-5-1]]

व चतहतारः। चतहतोऽिधयो िनिमतः। नन शम। नािभचिरतमागित। य एव वद। यो ह व चतहतणा चतहत वद। अथो पहोतम। सवा हा िदश क। वाचितहता दशहोतणाम। पिथवी हो ता चतहतणाम॥ १॥ [[3-12-5-2]]

अिहता पहोतणाम। वाघोता षोतणाम।

Page 14: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 14- www.sanskritweb.net/yajurveda

महाहिवहता सहोतणाम। एत चतहतणा चतहतम। अथो पहोतम। सवा हा िदश क। य एव वद। एषा व सविवा। एत षजम। एषा पिः ग लोका साऽयिनः ितः॥ २॥ [[3-12-5-3]]

एताोऽिददश यावरस म। रित। अनपवः सवमायरित। िवत जाम। रायोष गौपम। वचसी भवित। एताोऽित। णोाानम। जा िपतन। एताा अण औपविशिवदाकार॥ ३॥ [[3-12-5-4]]

एतरिधवादमपाजयत। अथो िव पाान म। ययौ। एताोऽित। अिधवाद जयित। अथो िव पाान म। रित। एतरि िचीत गका मः। एतरायामः।

Page 15: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 15- www.sanskritweb.net/yajurveda

जापशकामो वा॥ ४॥ [[3-12-5-5]]

पराशहोतारमदमपदधाित यावदम। दय यजषी पौ च। दिणतः ा चतहतारम। पाद पहोतारम। उरतः ा षोतारम। उपिराा सहोतारम। दय यज िष प। यथावकाश हान । यथावकाश ितहाोकपणा। सवा हाता दवता ीता अभीा भवि॥ ५॥ [[3-12-5-6]]

सदवमि िचनत। रथसिमतत । वो व रथ। वणव पा ान ात णत। पःसिमतत । एतावा रथ । यावः। रथसिमतमव िचनत। इममव लोक पशबनािभजयित। अथो अिोमन॥ ६॥ [[3-12-5-7]]

अिरमन। रितराण। सवाोकानहीनन। अथो सण। वरो दिणा।

Page 16: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 16- www.sanskritweb.net/yajurveda

वरणव वर णोित। आा िह वर । एकिवशितदिणा ददाित। एकिव शो वा इतः ग लोकः। ग लोकमा ोित॥ ७॥ [[3-12-5-8]]

असावािद एकिव शः। अममवािदमा ोित। शत ददाित। शताय पषः श तियः। आयविय ितितित। सह ददाित। सहसिमतः ग लोकः। ग लोकािभिज। अिक दिणा ददाित। सवािण वया िस॥ ८॥ [[3-12-5-9]]

सवा । सवाव। यिद न िवत। मान तावतो दादोदनाा । अत त काम म। य कामायािीयत । पौह वत दात। सा िह सवािण वया िस। सवा । सवाव॥ ९॥ [[3-12-5-10]]

िहरय ददाित।

Page 17: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 17- www.sanskritweb.net/yajurveda

िहरयोितरव ग लोकमित। वासो ददाित। तनाय ितरत। विदततीय यजत। िषा िह दवाः। स समि िचनत। तदतशब ाण यात। नतरष यष। यो ह व चतहतननसवन तपियताद॥ १०॥ [[3-12-5-11]]

तित जया पशिभ । उपन सोमपीथो नमित। एत व चतहतारोऽनसवन तपियता । य ाणा बिवद । तो यिणा न नय त। िर ात। अिम वीरन। तो यथा दात। िमवतियत। नााि वत॥ ११॥ [[3-12-5-12]]

िहरयको भवित। यावममिलकाड यपषा सिमतम। तजो िहरयम। यिद िहरय न िवत। शकरा अा उपदात। तजो घतम। सतजसमवाि िचनत। अि िचा सौ ामया यजत मावया वा ।

Page 18: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 18- www.sanskritweb.net/yajurveda

वीयण वा एष त। योऽि िचनत। यावदव वीय म। तदिधाित। ण साय सलोकतामाोित। एतासामव दवताना सायम। सािता समानलोकतामाोित। य एतमि िचनत। य उ चनमव वद। एतदव सािव ा णम। अथो नािचकत॥ १२॥ होता चतहतणा ितकार वा भविोमनाोित वया िस वया िस सवा सवाव वद वत िचनत नव च॥ ५॥ [[3-12-6-1]]

यामत य म म। य ािणित य न। सवाा इकाः का। उप कामघा दध। तनिषणा तन णा। तया दवतयाऽिरवा सीद। सवा िय सवा सः। सव न ीपम च यत। सवााः। यावः पासवो भम ॥ १॥ [[3-12-6-2]]

साता दवमायया । सवााः । याव ऊषा पशनाम। पिथा पििहताः।

Page 19: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 19- www.sanskritweb.net/yajurveda

सवााः। यावती िसकता सवा । अ याः िताः। सवााः। यावती शकरा ध । अा पिथामिध॥ २॥ [[3-12-6-3]]

सवााः। यावोऽमानोऽा पिथाम । ितास ितिताः। सवााः। यावतीवध सवा । िविताः पिथवीमन। सवााः। यावतीरोषधी सवा । िविताः पिथवीमन। सवााः॥ ३॥ [[3-12-6-4]]

यावो वनतयः। अा पिथामिध। सवााः। यावो ााः पशव सव। आरया य। सवााः। य िपादतादः। अपाद उदरसिपण । सवााः। यावदानमत ॥ ४॥ [[3-12-6-5]]

Page 20: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 20- www.sanskritweb.net/yajurveda

दवा य मानषम। सवााः॥ यावायस सवम। दवा य मानषम। सवााः । यावोहायस सवम। दवा य मानषम। सवााः। सव सीस सव प। दवा य मानषम॥ ५॥ [[3-12-6-6]]

सवााः। सव िहरय रजतम। दवा य मानषम। सवााः। सव सवण हिरतम। दवा य मानषम। सवाा इकाः का। उप कामघा दध। तनिषणा तन णा। तया दवतयाऽिरवा सीद॥ ६॥ भमरिध िविताः पिथवीमन सवाा उत मानष सीद॥ ६॥ य िय पासव ऊषा िसकता शकरा अमानो वीध ओषधीवनतयो ाा य िपादो यावदान यावायस लोहायस सीस िहरय सवण हिरतमादश॥ [[3-12-7-1]]

सवा िदशो िद। याभत ितितम। सवाा इकाः का। उप कामघा दध।

Page 21: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 21- www.sanskritweb.net/yajurveda

तनिष णा तन णा। तया दवतयाऽिरवा सीद। अिर च कवलम। यािरािहतम। सवााः। आिर याः जाः॥ १॥ [[3-12-7-2]]

गवारस य। सवााः। सवानदारािललान । अिर ितितान। सवााः। सवानदारािललान। ावराः ोा य। सवााः। सवा धिन सवा सान। िहमो य शीयत ॥ २॥ [[3-12-7-3]]

सवााः। सवारीचीिततान। नीहारो य शीयत। सवााः। सवा िवत सवा नियन। ानीय शीयत । सवााः। सवा वीः सिरत । सवमचर च यत। सवााः॥ ३॥ [[3-12-7-4]]

Page 22: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 22- www.sanskritweb.net/yajurveda

या का या नाा समिया । या वशीत ासचीयाः। सवााः। य चोिि जीमता । या वषि वय । सवााः। तपज आकाशम। याकाश ितितम। सवााः। वाय वया िस सवािण॥ ४॥ [[3-12-7-5]]

अिरचर च यत। सवााः। अि सय चम। िम वण भ गम। सवााः। स ा तपो दम म। नाम प च भताना म। सवाा इकाः का। उप कामघा दध। तनिषणा तन णा। तया दवतयाऽिरवा सीद॥ ५॥ जा िहमो य शीयत सवााः सवािण णक च॥ ७॥ िदशोऽिरमािर उदारानदारािन मरीचीित वीया य च तपो वायमि स पदश॥ [[3-12-8-1]]

सवािव सवा वाििव। याभत ितितम। सवाा इकाः का।

Page 23: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 23- www.sanskritweb.net/yajurveda

उप काम घा दध। तनिषणा तन णा। तया दवतयाऽिरवा सीद। यावतीारका सवा । िवतता रोचन िदिव। सवााः। ऋचो यजिष सामािन॥ १॥ [[3-12-8-2]]

अथवािरस य। सवााः। इितहासपराण च। सपदवजना य। सवााः। य च लोका य चालोकाः। अभत ितितम। सवााः। य या । अितितम॥ २॥ [[3-12-8-3]]

सवााः। अहोराािण सवािण। अधमासा कवलान। सवााः। सवानत वा ासान। सवर च कवलम। सवााः। सव भत सव भ म। यातोऽिधभिवित। सवाा इकाः का।

Page 24: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 24- www.sanskritweb.net/yajurveda

उप कामघा दध। तनिषणा तन णा। तया दवतयाऽिरवा सीद॥ ३॥ सामािन ितित क ा ीिण च॥ ८॥ िदव तारका ऋच इितहाराण च य च याहोराायतत नव॥ [[3-12-9-1]]

ऋचा ाची महती िदगत। दिणामायजषामपाराम। अथवणामिरसा तीची । साामदीची महती िदगत। ऋिः प वा िदिव दव ईयत। यजवद ितित म अ । सामवदना मय महीयत। वदरश ििभरित सय । ऋो जाता सवशो मितमाः। सवा गितयाजषी हव शत॥ १॥ [[3-12-9-2]]

सव तज साम ह शत। सव हद णा हव सम। ऋो जात वय वणमाः। यजवद ियायिन म। सामवदो ा णाना सितः। पव पव ो वच एतचः। आदशमि िचानाः। पव िवसजोऽमता । शत वषसहा िण। दीिताः समासत॥ २॥ [[3-12-9-3]]

तप आसीहपितः।

Page 25: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 25- www.sanskritweb.net/yajurveda

ाऽभवयम। स ह होतषामासी त। यिसज आसत। अमतम उदगायत। सह पिरवरान। भत ह ोतषामासीत। भिवित चाहरत। ाणो अयरभवत। इद सव िसषासताम॥ ३॥ [[3-12-9-4]]

अपानो िवानावत । िताितदर। आतवा उपगातार । सदा ऋतवोऽभवन। अधमासा मासा । चमसायवोऽभवन। अशसणज । अावाकोऽभवश । ऋतमषा शााऽऽसी त। यिसज आसत॥ ४॥ [[3-12-9-5]]

ऊाजानमदवहत। वगोपः सहोऽभवत। ओजोऽौाण। यिसज आसत। अपिचितः पोीयामयजत। नीयामयजििष । आीािषी सम। ा हवायजयम।

Page 26: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 26- www.sanskritweb.net/yajurveda

इरा पी िवसजा म। आकितरिपनिवः॥ ५॥ [[3-12-9-6]]

इ ह उ। ता चावहतामभ। वागषा सयाऽऽसी त। छोयोगािजानती। कतािण तानाऽह । सा सवशः। अहोरा पशपाौ। मताः ा अभवन। मदभवाता। शिमतोो िवशा पित ॥ ६॥ [[3-12-9-7]]

िवसज थमाः समासत। सहसम सतन य । ततो ह ज भवन गोपाः। िहरमय शकिन नाम। यन सय पित तजसः। िपता पण िपतमाोिनयोनौ। नावदिवनत त बह म। सवानभमाान सपराय। एष िनो मिहमा ा ण। न कमणा वधत नो कनीयान॥ ७॥ [[3-12-9-8]]

तवाा पदिव िविदा। न कमणा िल त पापकन। पपाशतिवत सवराः। पपाशत पदशाः।

Page 27: Taittiriya Brahmana - Kand

TaittirÁya-BrÀhmaÉa, edited by Subramania Sarma, Chennai 2004-2005, page 27- www.sanskritweb.net/yajurveda

पपाशत सदशाः। पपाशत एकिवशाः। िवसजा सहसवरम। एतन व िवसज इद िवमसज। यिमसज। तािसज । िवमना नन जायत। ण साय सलोकता यि। एतासामव दवताना सायम। सािता समानलोकता यि। य एतपयि। य चना । यना । ओम॥ ८॥ शदासत िसषासतामासत हिवित कनीयाािस जोऽौ च॥ ९॥ त दवपसा दवो व चतहतारो यामत सवा िदशो िद सवा िदवमचा ाची नव॥ ९॥ त तपसा ता वा एताः प िहरय ददाित सवा िदशप आसीहपिताशत॥ ५६॥ तमो म॥